Wednesday, 7 June 2017

समस्त भारत के ओज और गौरव का प्रतिबिम्ब हैं राजा भोज

लेखक : सचिन सिंह गौड़, संपादक, "सिंह गर्जना" हिंदी पत्रिका 

भारतीय इतिहास में राजा भोज आज भी सर्वाधिक लोकप्रिय राजा और लोकनायक के रूप में जन-जन में विख्यात हैं। हिन्दी भाषी क्षेत्र में इस कहावत से सभी परिचित हैं कि कहां राजाभोज और कहां गंगूतेली। दसवीं सदी के अंतिम दशक में जन्में राजा भोज ने 1010 ईस्वी से 1055 ईस्वी तक मध्य भारत में राज्य किया। उनकी राजधानी धारा (Dhar, MP) नगरी, जिसे वर्तमान में धार कहा जाता है, थी और उनका राज्य गुजरात तथा मध्यप्रांत के क्षेत्रों में फैला हुआ था।
प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान डॉ. रेवा प्रसाद द्विवेदी ने प्राचीन संस्कृत साहित्य पर शोध के दौरान मलयाली भाषा में भोज की रचनाओं की खोज करने के बाद यह माना है, कि राजा भोज का शासन सुदूर केरल के समुद्र तट तक था। राजा भोज ने मध्यप्रदेश की वर्तमान राजधानी भोपाल नगर की स्थापना की थी। लोक विश्वास है कि भोपाल का नाम भोजकाल में भोजपाल था। राजा भोज ने ही भोपाल में विस्तृत और विशाल प्राकृतिक झील को बांधकर तालाब का रूप दिया था, जो आज भी कायम है। राजाभोज द्वारा निर्मित शिवमंदिर, भोपाल के निकट भोजपुर में आज भी अपने विगत वैभव की याद दिलाता है। समस्त भारत के ओज और गौरव का प्रतिबिम्ब हैं राजा भोज। ये महानायक भारत कि संस्कृति में, साहित्य में, लोक-जीवन में, भाषा में और जीवन के प्रत्येक अंग और रंग में विद्यमान है। ये वास्तुविद्या और भोजपुरी भाषा और संस्कृति के जनक है।

‘‘राजा भोज’’ पुस्तक के लेखक एवं राजा भोज पर गहन शोध और अध्ययन कर चुके डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित के अनुसार ‘‘भारतीय राजाओं में परमार राजा भोज अद्धितीय है। उनकी राजधानी धारानगरी (धार) होने से घारेश्वर और राज्य का केन्द्र मालवा होने से मालवाधीश भी कहलाते थे। वे परम विद्धान, परम शक्तिशाली और सुयोग्य तथा लोकप्रिय राजा के रूप में अपने समय ही विख्यात हो गये थे। उनके ताम्रपत्र, शिलालेख तथा मुर्तिलेख प्राप्त होते है। अपने असामान्य कर्मो के कारण राजा भोज अपने युग में ही कथा कहानियां के नायक के रूप में प्रसिद्ध होने लगे थे। बाद में तो महाराज विक्रमादित्य के समान महाराज भोज भी भारत के ऐसे लोकनायक के रूप में मान्य हो गये कि उनकी कहानियाँ न केवल भारतीय जनता में, लोक में प्रसिद्ध हो गयी थी अपितु लंका, नेपाल, तिब्बत, मंगोलिया सहित कई देशो में भी फैल गयी थी। मंगोली भाषा मे ‘अराजि बुजि’ पुस्तक राजा भोज सम्बन्धी है। राजा भोज की ‘चाणक्यमाणिक्य’ पुस्तक का एक तिब्बती रूप भी प्राप्त होता है। राजा भोज इतिहास पुरुष होते हुए भी मिथक पुरुष हो गये। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की। वे अपने अपने युग के मित्र राजाओं के समान शत्रु राजाओं के भी अपने विविध वर्णी उदात्त गुणों के कारण आदर्श बन गये थे। यही नहीं सदियों तक परवर्ती अनेक राजा भी स्वयं को लघु भोजराज, अपर भोजराज, नव भोजराज आदि कहने में गौरव का अनुभव करते रहे है। राजा भोज के अभिलेख 1010 से 1034 ई. तक प्राप्त होते है।’’

राजा भोज की आयु
एक परम्परा कहती है कि राजा भोज की आयु 90 वर्ष रही। 1055 में से 90 कम होने पर 965 ई. भोज का जन्म सन प्रतीत होता है। अन्य परम्परा कहती है कि राजा भोज ने 55 वर्ष 7 मास 3 दिन तक राज्य किया। इससे प्रतीत होता है कि 999 ई. में राजा भोज ने राजसिंघासन ग्रहण किया था। और उस समय वे 34 वर्ष 4 मास 27 दिन के हो चुके थे। इस समय तक जिसका 1010 ई. का मोडासा (गुजरात) ताम्रपत्र प्राप्त होते है। दूसरे पुत्र देवराज का किराडू लेक 1002 ई. का प्राप्त होते है। यह राजस्थान के कुछ भाग (भिनमालादि) का राज्यपाल था। इनकी एक बेटी राजमती थी। इसका साँभर के राजा बीसलदेव से विवाह हुआ था। एक भीली लोक कथा के अनुसार राजा भोज के एक पुत्र का नाम वीरसिंघ था। एक जैन ग्रन्थ के अनुसार 1077 (1020ई.) में राजा भोज के पुत्र वीरनारायण ने सेवाणा बसाया। राजा भोज की एक उपाधि त्रिभुवननारायण थी। अतः उनके पुत्र का नाम वीरनारायण होना असंभव नहीं है। इस वीरनारायण को ही भीली कथा में वीरसिंघ कहा गया अथवा ये दोनों मित्र थे- यह प्रमाणाभाव में नहीं कहा जा सकता। 

राजा भोज की यों तो सौ पत्नियों का उल्लेख प्राप्त होता है। परन्तु गुणमंजरी, सौभाग्यसुन्दरी, सत्यवती, मदनमंजरी, भानुमति, लीलावती, सुभद्रा आदि रानियों के नाम प्राप्त होते है। इनमें से लीलावती पटरानी बतायी गयी है। जिस प्रकार सम्भवतः अपात्र होने से मुंज ने अपने पुत्रांे को परमारों के मालवा की केन्द्रीय सत्ता नहीं सौपी थी और न भोज के अग्रज को सौंपी, बल्कि सर्वाधिक योग्य होने से भोजदेव को ही राजा बनाया था, यहाँ तक कि उसने अपने अनुज सिन्धुल को भी सत्ता नही सौंपी, उसी प्रकार सम्भवतः पात्रता के आधार पर ही राजा भोज ने अपने किसी भाई-बन्धु या पुत्र को सत्ता न सौंपते हुए पौत्र जयसिंघ को मालवा का अपना उत्तराधिकारी बनाया था। 

राजा भोज के पराक्रम को भारतीय जनसाधारण ने जो स्वीकृति दी है। उसका ही परिणाम यह सर्वज्ञात और लोकप्रिय कहावत है ‘कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगू तेली (या गांगी तेलन)।’ इस कहावत के द्वारा जनता ने तत्कालीन परम प्रतापी गांगेयदेव और तेलन को एक साथ भोज ने पराजित कर दिया था-इस बात को सदा के लिए जनमन में स्थापित कर दिया। इससे राजा भोज की शक्ति की धाक सब मानने लगे थे। यही कारण है कि यह कहावत भारत की विभिन्न भाषाआंे और बोलियांे में सुप्रचलित और सर्वमान्य है। 

राजा भोज की विजय और साम्राज्य
राजा भोज ने चेदि के कलचुरि राजा गांगेयदेव, कर्णाटक के चालुक्य राजा तैलप द्धितीय, आदि-नगर के राजा इन्द्ररथ, लाट के भीमदेव, कान्यकुब्ज के गुर्जर प्रतिहार राजा राज्यपाल, तुरुष्क (तर्क) राजा, शालम्भरी के चैहान राजा वीर्यराम, डुबकुण्ड के राजा अभिमन्यु, विदर्भ के राजा भिल्ल्स (तृतीय) सहित विभित्र राजाओं को पराजित करके अपनी राजशक्ति और राज्यसीमा में पर्याप्त वृद्धि कर ली थी। राजा भोज के बहुमुखी सामथ्र्य के कारण सैकड़ों राजा यशस्वी भोज को अपना राजाधिराज मानते थे। राजा भोज की कृपा अर्जित करने के लिए तथा उनसे सन्धि करने के लिए कन्योपायन आदि के लिए विभिन्न राजा आतुर रहते थे। परिणामः राजा भोज के राज्यक्षेत्र औए प्रभावक्षेत्र में प्रायः पूरा भारत बताया जाता रहा। प्रबन्धचिन्तामणि के अनुसार चोल, आन्ध्र, कर्णाटक, गुर्जर, चोदी, कान्यकुब्ज (कन्नौज का राजा) सहित विभिन्न राजा लोग राजा भोज के प्रभाव क्षेत्र में थे और वे सदा उसका भयभरा आदर करते थे। 

पारम्परिक साहित्य में राजा भोज के राज्यक्षेत्र बताने वाले कई श्लोक है जिनकी पुष्टि शिलालेखों से भी होती है। ऐसे ही एक पूर्वाक्त श्लोक से ज्ञात होता है कि राजा भोज ने 55 वर्ष 7 माह और 3 दिन तक राज्य शासन किया। 
राजा भोज ने गौड़ सहित दक्षिणापथ पर राज्य किया। उदरपुर प्रशासित नामक प्रसिद्ध शिलालेख में कहा गया है कि कैलास पर्वत (तिब्बत) से मलयगिरि (केरल) तक तथा पूर्व में उदयांचल से पश्चिम में अस्तांचल तक व्याप्त पुरे भारत की पृथ्वी पर राजा पृथु के समान राजा भोज ने शासन किया। राजा भोज के ग्रंथो से भी ज्ञात होता है कि उनके सामन्तों की संख्या सैकड़ों में थी। राजा भोज राजाओं के भी राजा थे। 

राजा भोज का जीवन क्रम 
965 ई. में राजा भोज का जन्म। 
973 ई. में आठ वर्ष की अवस्था में युवराज (राजा?)बनना। 
1015-1019 राजा भोज का चालुक्य जयसिंघ से युद्ध। 
1019 कोंकण पर अधिकार। 
1025 सोमनाथ पर महमूद का आक्रमण। 
1030 भोज और भीम द्दारा सोमनाथ मंदिर का पुर्ननिर्माण। 
1030 भोज के राज्यकाल में अल्बरुनी का धार आना। 
1035 भोज की त्रिपुरी पर विजय। 
1036 भोज की कन्नौज पर विजय। 
1042 कल्याणी के चालुक्य जयसिंघ को पराजित कर मार देना।

Sunday, 4 June 2017

अग्निवंश परमार (पंवार) क्षत्रिय के गांवों की सूची

मालवा  (M.P.) में
""अग्निवंशी"" परमार ( पंवार ) क्षत्रिय के गाँवो की सूची जिसे इतिहास में ""पंवार पट्टी"" कहा जाता हे ।
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       जय श्री महांकाल
सूची::--
1~उज्जैन
2~शाजापुर
3~सारंगपुर
4~मऊ
5~पडाना
6~आसारेटा
7~नारायणगढ़ खेड़ा
8~करौंदी
9~बागनखेड़ा
10~टिकोद
11~पिपलोदा
12~खामखेड़ा पंथ
13~नोलाया
14~मितेरा
15~कड़वाला
16~बेदारनगर
17~बुडलाय
18~केवडाखेड़ी
19~इचवाड़ा
20~सलसलाई
21~उगाय
22~पटलावदा
23~गांगलाखेड़ी
24~खेड़ीनगर
25~अकोदिया
26~फुलेन
27~पलसावद
28~नितरडी
29~मोरटा मलोथर
30~बेरछा
31~सिमरोल
32~खामखेड़ा सूं
33~खाटसुर
34~मगोद
35~हड़लाय
36~बटवाडी
37~उंचोद
38~बावनहेडा
39~नादासुरा
40~मउघाट
41~कमलिया
42~बाँकाखेड़ी
43~बोल्दा
44~निमखेड़ी
45~अरनिया खुर्द
46~पाड़लिया
47~मैना
48~बिसनखेड़ा
49~खेजड़िया
50~पंचदेहरिया
51~बिन्नी
52~बांसला
53~ताजपुर
54~मण्डावर
55~शुजालपुर
56~लसुडल्या हेजम
57~बगनाखेड़ी
58~झाड़ला
59~इमलीखेड़ा
60~गूंदपिपली
61~कालापीपल गाँव
62~चारखेडी
63~खजुरिया
64~डोराबाद
65~जाबड़िया
66~फरड
67~मादलाखेड़ी
68~नानुखेड़ी
69~लसुडल्या मलक
70~हड़लाय खुर्द
71~ढाबला बड़ा
72~अरनियां कँला
73~बमुलिया मुच्छाली
74~लाखखेड़ी
75~कोलवा
76~शेरपुरा
77~पोचानेर
78~गाडराखेड़ी
79~बदलपुर
80~रोलाखेड़ी
81~हराजखेड़ा
82~बावड़ीखेड़ा
83~गोदी
84~बड़लिया
85~बगड़ावदा
86~आष्टा
87~किलेरामा
88~सिद्दिकगंज
89~भुपोड़
90~भटोनी
91~भँवरा
92~भवरी
93~मुलांनी
94~अरनियां राम
95~अरनियां दाउद
96~बाउपुरा
97~जमुनिया
98~चैनपुरा
99~बिजोरी
100~बागनखेड़ा
101~हरसपुर
102~ढाबला माता
103~इछावर
104~पालखेड़ी
105~जामली
106~ढेकिया
107~खारपा
108~बिजोरा
109~कउडिया
110~लाटाहेडी
111~सिहोर
112~बावडिया
113~पीलिया
114~पचामा
115~मुरदी
116~आलमपुरा
117~भैंसाखेड़ी
118~बड़ा बमुलिया
119~उलझामन
120~हीरापुर(सिहोर)
121~ढाबला केलवाड़ी
122~भोजनगर
123~झागरिया
124~कोटरा
125~नीलबड़
126~रातीबड़
127~भोपाल
128~नानाखेडी
129~सनोटी
130~आशापुरी
131~पचामा ताल
132~नादूर
133~वागसेवनिया
134~वागमुगालिया
136~लाहारपुर
137~अमरावद खुर्द
138~उमरिया
139~रतनपुर
140~खामखेड़ा भोपाल
141~ओबेदुल्लागंज
142~कुश्मान्या
143~सोनखेड़ी
144~नन्डाडई
145~अड्डान्या
146~देवसिरलिया
147~किटिया
148~थुरिया
149~जाकठा
150~भिलाई
151~नादौन
152~मोहाई
153~पटरानी
154~उंकारा
155~गड़वाय
156~काटकुट
157~शेरगुणा
158~पिपलदा
159~कन्नौद
160~खातेगांव
161~मुवाड़ा
162~ककडदी
163~नेमावर
164~देवास
165~इंदौर
166~खेडीमण्डलखा
167~दुबड़िया
168~श्रंगारपुर
169~सलकनखेड़ी
170~कुंलाश कलाँ
171~कुलांश खुर्द
172~पिपलनेर
173~लाड़कुई
174~लिलाखेड़ी
175~बड़नगर
176~खेरी
177~लचोर
178~निपानियाँ
179~लिलिमोड
180~मुण्डला बड़ा
181~मुंडला खुर्द
182~मंडीदीप
183~मो,खेड़ा
184~हीरापुर (करौंदी)
185~जबड़ी
186~तकीपुर
187~कालापीपल मंडी
188~आलनिया
189~ढाबला घोसी
190~मेरखेड़ी
191~पिथमपुर
192~अलादाखेड़ी
193~राणोगंज
194~टपका बसंतपुर
195~हरई
196~धबोटी (बमुलिया)
197~खारियाखेडी
198~जामनेर (नेमावर)
199~बिछोली(इछावर)

Saturday, 3 June 2017

इजरायल देश के बारे में रोचक तथ्य

इजरायल एक छोटा सा देश है। यह विश्व में एकमात्र यहुदी राष्ट्र है। चारों तरफ से दुशमनों से घिरे इजरायल देश में हर व्यक्ति सेना में भरती होता है औऱ अपने देश के प्रति कर्तव्य निभाता है।  देशभक्ति सीखनी है तो इजरायल से सीखो. आज हम इजरायल देश के बारे में रोचक तथ्य बताएंगे , ये तथ्य आपने कभी नहीं पढ़े होंगे…

इजरायल देश के बारे में रोचक तथ्य

1. इजरायल दुनिया का अकेला यहूदी राष्ट्र है। जो अपनी पैदाइश के मुताबिक सबसे नया(67 वर्ष) है।

2. इजरायल की जनसंख्या न्यूयॉर्क की आधी जनसंख्या के बराबर है। इजराइल का कुल क्षेत्रफल इतना है कि तीन इजराइल मिल कर भी राजस्थान जितना नहीं हो सकते।
3. इजरायल की भाषा हिब्रू भाषा दुनिया में इकलौती ऐसी भाषा है, जिसको पुनर्जन्म मिला है। हिब्रू और अरबी यहां की आधिकारिक भाषा है।

4. इजरायल दुनिया का एकमात्र ऐसा मुल्क है, जहां महिलाओं को अनिवार्य रूप से सैन्य सेवा में काम करना होता है।

5. इजरायल दुनिया में उन 9 देशों में शामिल है, जिसके पास अपना सेटेलाइट सिस्टम है। जिसके इस्तेमाल से वो ड्रोन चलाता है। इजरायल अपने सेटेलाइट सिस्टम किसी के साथ साझा नहीं करता।

6. इजरायल दुनिया का एकमात्र देश है, जिसके क्षेत्र में 21वीं सदी में 20वीं सदी की तुलना में अधिक वृक्ष थे।

7. Narendra Modi उस समय प्रधानमंत्री नही थे जब उन्होने इजरायल की यात्रा की थी.

8. इजरायल की वायुसेना दुनिया में चौथे नंबर की वायुसेना है।यह किसी भी हमले की सूरत में न सिर्फ जवाब देने में सक्षण हैं, बल्कि किसी भी दुश्मन को पल भल में तहस नहस करने की क्षमता रखते हैं। सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ही उससे आगे है।

9. इजरायल दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो समूचा एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है। इजरायल के किसी भी हिस्से में रॉकेट दागने का मतलब है मौत। इजरायल की ओर जाने वाला हर मिसाइल रास्ते में ही दम तोड़ देता है।

10. इजरायली बैंक द्वारा जारी नोट को दृष्टिहीन भी पहचान सकते हैं, क्योंकि उसमें ब्रेल लिपि का भी इस्तेमाल किया जाता है।

11. इजरायल घरेलू कंप्यूटर उपयोग के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है। दुनिया में पहला फोन मोटोरोला कंपनी ने इजरायल में ही बनाया था और माइक्रोसॉफ्ट के लिए पहला पेंटियम चिप इजरायल में ही बना था। यही नहीं, पहली वॉइस मेल तकनीक इजरायल में ही विकसित की गई थी।

12. इजरायल अपने जन्म से अब तक 7 लड़ाइयां लड़ चुका है। जिसमें अधिकतम में उसने जीत हासिल की है। इजरायल दुनिया में जीडीपी के प्रतिशत के मामले में सर्वाधिक खर्च रक्षा क्षेत्र पर करता है।

13. इजरायल के सभी स्टूडेंट्स, चाहे वह लड़का हो या लड़की, को हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिवार्य रूप से मिलिट्री सर्विस जॉइन करनी पड़ती है. इस सर्विस की अवधि लड़कों के लिए तीन साल और लड़कियों के लिए 2 साल होती है।

14. इजराइल कभी किसी देश या संगठन को यह नहीं कहता कि हमारे देश में आंतकवादी घटनाये या हमला मत कीजिये….
बल्कि इजराइल कहता है अगर किसी ने हमारे देश के एक नागरिक को मारा तो हम उस देश में घुस कर के उसके 1000 नागरिकों को मार देंगे।

15. अगर आप इजराइल के दुश्मन हो और आप मुस्लिम हो तो आपका इस दुनिया में कही भी जिन्दा रह पाना मुश्किल ही नहीं नामुनकिन है।

16. युद्ध में इजराइल का कोई मुकाबला नहीं है जैसे हमने बताया एक बार 7 देश एक साथ मिलकर कोशिश कर चुके हैं लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी और बचा-कूचा विवादित क्षेत्र भी इजराइल ने हथिया लिया था।

17. दुनिया के किसी भी देश की तुलना में इजरायल के पास प्रति व्यक्ति म्यूजियम की संख्या सबसे अधिक है।

18. 1952 में अमेरीका ने Albert einstein को इजराइल का राष्ट्रपति बनने की पेशकश की परन्तु आइंस्टीन ने यह पेशकश यह कह कर ठुकरा दी कि वह राजनीति के लिए नही बने. इसका कारण यह है कि आइंनस्टाइन एक यहुदी थे और इजराइल एक यहुदी देश।

19. इजरायल में रविवार के दिन नाक साफ नही कर सकते। ऐसा करने पर आप पर मामला दर्ज हो सकता है।

20. दुनिया में पहला एंटीवायरस सबसे पहले सन 1979 में इजरायल में बना। माइक्रोसॉफ्ट और सिस्को ने अमेरिका के बाहर अपने रिसर्च सेंटर सिर्फ इजरायल में ही बनाए।

21. आपको जानकर हैरानी होगी कि हर पाकिस्तानी पासपोर्ट पर लिखा होता है कि यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशो में मान्य है।

22. इजरायल के कृषि उत्पादों में 25 साल में सात गुणा बढ़ोतरी हुई है, जबकि पानी का इस्तेमाल जितना किया जाता था, उतना ही अब भी किया जा रहा है।

23. इजरायल अपनी जरुरत का 93 प्रतिशत खाद्य पदार्थ खुद पैदा करता है। खाद्यान्न के मामले में इजरायल लगभग आत्मनिर्भर है।

24. दुनिया की सबसे छोटी बाइबल इजरायल में तैयार हुई है, जो 4.76 मिलीमीटर लंबी और चौड़ी है।

25. जब फिलिस्तीनी आतंकवादियो ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक गेम्स विलेज में घुसकर 12 इस्राइली खिलाडियों की हत्या कर दी थी, तब प्रधानमंत्री श्रीमती गोल्डा मायर ने सारे मृत खिलाडियो के घरवालो को खुद फोन करके कहा की हम बदला लेकर रहेंगे। उन्होंने अपनी गुप्तचर एजेंसी मोसाद को पूरी छुट दे दी और कहा “इस घटना में जितने लोग भी शामिल है, वो चाहे दुनिया के किसी भी देश में हो , उनको जिन्दा नहीं रहने देना है।

26. इजरायल में तय वजन से कम वजन होने पर किसी भी सुंदरी को प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया जाता। यहां स्वस्थता का मतलब कम वजन बिल्कुल भी नहीं है।

27. इजरायल में यहूदी सुअर नही पाल सकते। यह कानूनन जुर्म है।

28. इजरायल के 10 में से 9 घर सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। सबसे ज्यादा सोलर एनर्जी का इस्तेमाल पानी गर्म करने में होता है।

29. शिक्षा की बात करें तो जनसंख्या के हिसाब से सर्वाधिक विश्वविद्यालय इजरायल में है। यहां प्रति 10 हजार की आबादी में 109 रिसर्च पेपर प्रकाशित होते हैं। जो दुनिया में सर्वाधिक है। यहां किताबों के मामले में प्रति व्यक्ति के हिसाब से सर्वाधिक किताबें छपती हैं।

30. इजरायल में सिर्फ 40 बुक स्टोर्स हैं। क्योंकि सरकार हर किताब को मुहैय्या कराती है। इजराय में छपने वाली हर किताब की एक कॉपी जेविश नेशनल यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में रखी जाती है।

31. इजरायली मीडिया को मिडिल ईस्ट के देशों की तुलना में सर्वाधिक स्वतंत्रता हासिल है। इजरायल दुनिया में किसी भी देश से ज्यादा मीडिया कवरेज पाता है।

32. इजरायल जैसे छोटे से देश में 37 राजनीतिक पार्टियों ने सन 2013 के चुनाव में हिस्सा लिया था। इजरायल मिडिल ईस्ट का इकलौता ऐसा देश है, जहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार हासिल है।

33. इजरायल हीरों की होल सेल व्यवसाय का केंद्र है। यहां दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सर्वाधिक हीरों की कटिंग और पोलिशिंग होती है।

34. इजरायल में 137 ऑफिसियल बीच हैं। जबकि इजरायल के पास महज 273 किमी समुद्री तट है।

35. इजरायल व्यावसायिक दृष्टि से दुनिया में तीसरे स्थान पर है। इजरायल में 3000 से अधिक हाई-टेक कंपनी हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा(सिलिकॉन वैली को छोड़कर) है।

36. इजरायल दुनिया में सर्वाधिक शरणार्थियों को आश्रय देने वाला देश है। दुनिया भर के यहूदियों को जन्म लेते ही इजरायल की नागरिकता मिल जाती है। जो जब चाहें वहां बस सकते हैं।

साभार – गजबहिन्दी

Monday, 29 May 2017

अमर सिंह राठौर

मुस्लिम बादशाह शाहजहां के दरबार में राठौर वीर अमर सिंह एक ऊंचे पद पर थे। एक दिन शाहजहाँ के साले सलावत खान ने भरे दरबार में अमर सिंह को हिन्दू होने कि वजह से गालियाँ बकी और अपमान कर दिया...
अमर सिंह राठौर के अन्दर हिन्दू वीरों का खून था...
सैकड़ों सैनिको और शाहजहाँ के सामने वहीँ पर दरबार में अमर सिंह राठोड़ ने सलावत खान का सर काट फेंका ... ये कुछ ऐसा था जैसा 'ग़दर' फिल्म में सनी देओल हैंडपंप उखाड़ कर हज़ारों के सामने ही मुस्लिम के जिस्म में ठोंक दिया था...
शाहजहाँ कि सांस थम गयी..और इस शेर के इस कारनामे को देख कर मौजूद सैनिक वहाँ से भागने लगे...अफरा तफरी मच गयी... किसी की हिम्मत नहीं हुई कि अमर सिंह को रोके या उनसे कुछ कहे। मुसलमान दरबारी जान लेकर इधर-उधर भागने लगे। अमर सिंह अपने घर लौट आये।
अमर सिंह के साले का नाम था अर्जुन गौड़। वह बहुत लोभी और नीच स्वभाव का था। बादशाह ने उसे लालच दिया। उसने अमर सिंह को बहुत समझाया-बुझाया और धोखा देकर बादशाह के महल में ले गया। वहां जब अमर सिंह एक छोटे दरवाजे से होकर भीतर जा रहे थे, अर्जुन गौड़ ने पीछे से वार करके उन्हें मार दिया। ऐसे हिजड़ों जैसी बहादुरी से मार कर शाहजहाँ बहुत प्रसन्न हुआ ..उसने अमर सिंह की लाश को किले की बुर्ज पर डलवा दिया। एक विख्यात वीर की लाश इस प्रकार चील-कौवों को खाने के लिए डाल दी गयी।
अमर सिंह की रानी ने समाचार सुना तो सती होने का निश्चय कर लिया, लेकिन पति की लाश के बिना वह सती कैसे होती। रानी ने बचे हुए थोड़े राजपूतों को और फिर बाद में सरदारों से अपने पति कि लाश लाने को प्रार्थना की पर किसी ने हिम्मत नहीं कि और तब अन्त में रानी ने तलवार मंगायी और स्वयं अपने पति का शव लाने को तैयार हो गयी।
इसी समय अमर सिंह का भतीजा राम सिंह नंगी तलवार लिये वहां आया। उसने कहा- 'चाची! तुम अभी रुको। मैं जाता हूं या तो चाचा की लाश लेकर आऊंगा या मेरी लाश भी वहीं गिरेगी।'
पन्द्रह वर्ष का वह राजपूत वीर घोड़े पर सवार हुआ और घोड़ा दौड़ाता सीधे बादशाह के महल में पहुंच गया। महल का फाटक खुला था द्वारपाल राम सिंह को पहचान भी नहीं पाये कि वह भीतर चला गया, लेकिन बुर्ज के नीचे पहुंचते-पहुंचते सैकड़ों मुसलमान सैनिकों ने उसे घेर लिया। राम सिंह को अपने मरने-जीने की चिन्ता नहीं थी। उसने मुख में घोड़े की लगाम पकड़ रखी थी। दोनों हाथों से तलवार चला रहा था। उसका पूरा शरीर खून से लथपथ हो रहा था। सैकड़ों नहीं, हजारों मुसलमान सैनिक थे। उनकी लाशें गिरती थीं और उन लाशों पर से राम सिंह आगे बढ़ता जा रहा था। वह मुर्दों की छाती पर होता बुर्ज पर चढ़ गया। अमर सिंह की लाश उठाकर उसने कंधे पर रखी और एक हाथ से तलवार चलाता नीचे उतर आया। घोड़े पर लाश को रखकर वह बैठ गया। बुर्ज के नीचे मुसलमानों की और सेना आने के पहले ही राम सिंह का घोड़ा किले के फाटक के बाहर पहुंच चुका था।
रानी अपने भतीजे का रास्ता देखती खड़ी थीं। पति की लाश पाकर उन्होंने चिता बनायी। चिता पर बैठी। सती ने राम सिंह को आशीर्वाद दिया- 'बेटा! गो, ब्राह्मण, धर्म और सती स्त्री की रक्षा के लिए जो संकट उठाता है, भगवान उस पर प्रसन्न होते हैं। तूने आज मेरी प्रतिष्ठा रखी है। तेरा यश संसार में सदा अमर रहेगा।'
(क्यों भारतीय इतिहास से ये कथाएं गायब की गईं.. इन्हें पुस्तको में लाना होगा)

ऐसा राजा जिसे इतिहास ने भूला दिया, बनाया था भारत को सोने की चिड़िया

बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमदित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था, उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य…
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे।
रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे, उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है। विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे , विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में  इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ?